कला सामान्य ज्ञान

खेल

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बचपन का खेल.एसोसिएशन फुटबॉल, ऊपर दिखाया गया है, एक टीम खेल है जो सामाजिक कार्यों को भी प्रदान करता है।

खेल, कई नियमों एवं रिवाजों द्वारा संचालित होने वाली एक प्रतियोगी गतिविधि है। खेल सामान्य अर्थ में उन गतिविधियों को कहा जाता है, जहाँ प्रतियोगी की शारीरिक क्षमता खेल के परिणाम (जीत या हार) का एकमात्र अथवा प्राथमिक निर्धारक होती है, लेकिन यह शब्द दिमागी खेल (कुछ कार्ड खेलों और बोर्ड खेलों का सामान्य नाम, जिनमें भाग्य का तत्व बहुत थोड़ा या नहीं के बराबर होता है) और मशीनी खेल जैसी गतिविधियों के लिए भी प्रयोग किया जाता है, जिसमें मानसिक तीक्ष्णता एवं उपकरण संबंधी गुणवत्ता बड़े तत्व होते हैं। सामान्यतः खेल को एक संगठित, प्रतिस्पर्धात्मक और प्रशिक्षित शारीरिक गतिविधि के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें प्रतिबद्धता तथा निष्पक्षता होती है। कुछ देखे जाने वाले खेल इस तरह के गेम से अलग होते है, क्योंकि खेल में उच्च संगठनात्मक स्तर एवं लाभ (जरूरी नहीं कि वह मौद्रिक ही हो) शामिल होता है। उच्चतम स्तर पर अधिकतर खेलों का सही विवरण रखा जाता है और साथ ही उनका अद्यतन भी किया जाता है, जबकि खेल खबरों में विफलताओं और उपलब्धियों की व्यापक रूप से घोषणा की जाती है।

जिन खेलों का निर्णय निजी पसंद के आधार पर किया जाता है, वे सौंदर्य प्रतियोगिताओं और शरीर सौष्ठव कार्यक्रमों जैसे अन्य निर्णयमूलक गतिविधियों से अलग होते हैं, खेल की गतिविधि के प्रदर्शन का प्राथमिक केंद्र मूल्यांकन होता है, न कि प्रतियोगी की शारीरिक विशेषता। (हालाँकि दोनों गतिविधियों में "प्रस्तुति" या "उपस्थिति" भी निर्णायक हो सकती हैं)।

खेल अक्सर केवल मनोरंजन या इसके पीछे आम तथ्य को उजागर करता है कि लोगों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम करने की आवश्यकता है।

हालाँकि वे हमेशा सफल नहीं होते है। खेल प्रतियोगियों से खेल भावना का प्रदर्शन करने और विरोधियों एवं अधिकारियों को सम्मान देने व हारने पर विजेता को बधाई देने जैसे व्यवहार के मानदंड के पालन की उम्मीद की जाती है।

 

 

व्युत्पत्ति[संपादित करें]

"खेल" ("स्पोर्ट") शब्द की पुराने फ्रेंच शब्द देस्पोर्ट (desport) से उत्पत्ति हुई है, जिसका अर्थ "अवकाश" है।

इतिहास[संपादित करें]

 
2सरी शताब्दी AD, माय्रण के डिस्कोबोलोस के रोमन पीतल की कटौती।

प्राप्त कलाकृतियों और ढाँचों से पता चलता है कि चीन के लोग लगभग 4000 ईसा पूर्व से खेल की गतिविधियों में शामिल थे।[1] ऐसा प्रतीत होता है कि चीन के प्राचीन काल में जिम्नास्टिक एक लोकप्रिय खेल था। तैराकी और मछली पकड़ना जैसे खेलों के साथ कई खेल पूरी तरह से विकसित और नियमबद्ध थे। इनका संकेत फराहों के स्मारकों से मिलता है।[2] मिस्र के अन्य खेलों में भाला फेंक, ऊँची कूद और कुश्ती भी शामिल थी। फारस के प्राचीन खेलों में जौरखानेह (Zourkhaneh) जैसा पारंपरिक ईरानी मार्शल आर्ट का युद्ध कौशल से गहरा संबंध था।[3] अन्य खेलों में फारसी मूल के पोलो और खेल में सवारों का द्वंद्वयुद्ध शामिल हैं।

प्राचीन यूनानी काल में कई तरह के खेलों की परंपरा स्थापित हो चुकी थी और ग्रीस की सैन्य संस्कृति और खेलों के विकास ने एक दूसरे को काफी प्रभावित किया। खेल उनकी संस्कृति का एक ऐसा प्रमुख अंग बन गया कि यूनान ने ओलिंपिक खेलों का आयोजन किया, जो प्राचीन समय में हर चार साल पर पेलोपोनेसस के एक छोटे से गाँव में ओलंपिया नाम से आयोजित किये जाते थे।[4]

प्राचीन ओलंपिक्स से वर्तमान सदी तक खेल आयोजित किये जाते रहे हैं और उनका विनियमन भी होता रहा है। औद्योगिकीकरण की वजह से विकसित और विकासशील देशों के नागरिकों के अवकाश का समय भी बढ़ा है, जिससे नागरिकों को खेल समारोहों में भाग लेने और दर्शक के रूप में मैदानों तक पहुँचने, एथलेटिक गतिविधियों में अधिक से अधिक भागीदारी करने और उनकी पहुँच बढ़ी है। मास मीडिया और वैश्विक संचार माध्यमों के प्रसार से ये प्रवृत्तियाँ जारी रहीं। व्यवसायिकता की प्रधानता हुई, जिससे खेलों की लोकप्रियता में वृद्धि हुई, क्योंकि खेल प्रशंसकों ने रेडियो, टेलीविजन और इंटरनेट के माध्यम से व्यावसायिक खिलाड़ियों के खेल का बेहतरीन आनंद लेना शुरू किया। इसके अलावा व्यायाम और खेल में शौकिया भागीदारी का आनंद लेने का रिवाज भी बढ़ा।

नई सदी में, नए खेल, प्रतियोगिता के शारीरिक पहलू से आगे जाकर मानसिक या मनोवैज्ञानिक पहलू को बढ़ावा दे रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक खेल संगठन दिन पर दिन लोकप्रिय होते जा रहे हैं।

क्रियाएं, जहाँ परिणाम गतिविधि पर निर्णय से निर्धारित होता है, उन्हें प्रदर्शन या प्रतिस्पर्धा माना जाता है।

खेल भावना[संपादित करें]

खेल भावना एक दृष्टिकोण है, जो ईमानदारीपूर्वक खेलने, टीम के साथियों और विरोधियों के प्रति शिष्टाचार बरतने, नैतिक व्यवहार और सत्यनिष्ठा दिखाने तथा जीत या हार में बड़प्पन के प्रदर्शन की प्रेरणा देता है।[5][6]

खेल भावना एक आकांक्षा या लोकाचार को अभिव्यक्त करती है कि गतिविधि का आनंद खुद गतिविधि ही उठाये। खेल पत्रकार ग्रांटलैंड राइस का प्रसिद्ध कथन है कि "यह अहम नहीं है कि तुम हारे या जीते, अहम यह है कि तुमने खेल कैसा खेला", आधुनिक ओलिंपिक भावना की अभिव्यक्ति इसके संस्थापक पियरे डी कॉबिरटीन ने इस प्रकार की है कि "सबसे महत्वपूर्ण बात है।..जीतना नहीं, बल्कि इसमें हिस्सा लेना" ये इस भावना की विशिष्ट अभिव्यक्ति हैं।

खेल में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और जानबूझकर आक्रामक हिंसा के बीच की रेखा को पार करने से ही हिंसा पैदा होती है। एथलीट, कोच, प्रशंसक, कभी अभिभावक कभी-कभी गुमराह वफादारी, प्रभुत्व, क्रोध, या उत्सव के तौर पर लोगों और संपत्ति को हिंसा की भेंट चढ़ा देते हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में हुड़दंग और गुंडागर्दी आम बात हो गयी है और यह एक बड़ी समस्या बन गयी है।

व्यावसायिकता[संपादित करें]

 
आधुनिक खेलों के नियम, जटिल होते हैं और इनका अत्यधिक आयोजन होता है।

खेल के मनोरंजन वाले पहलू, मास मीडिया के प्रसार और अवकाश के लिए समय बढ़ने के साथ-साथ खेलों में व्यावसायिकता बढ़ी है। इसकी वजह से कुछ-कुछ संघर्ष के हालात भी पैदा हुए हैं, जहाँ भुगतान का चेक मनोरंजक पहलुओं से ज्यादा अहम हो जाता है या जहाँ खेलों को ज्यादा से ज्यादा मुनाफेदार और लोकप्रिय बनाने की कोशिश की जाती है और इस तरह कुछ महत्वपूर्ण परंपराएं लुप्त होती जाती हैं।

खेल के मनोरंजन पहलू का मतलब यह भी है कि खिलाड़ियों और महिलाओं को अक्सर सेलिब्रिटी की हैसियत हासिल होती है।

राजनीति[संपादित करें]

समय के साथ खेल और राजनीति ने एक-दूसरे को काफी प्रभावित किया है।

जब दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद सरकारी नीति थी, खेलों से जुड़े कई लोग, विशेष रूप से रग्बी यूनियन में आम सहमति से एक दृष्टिकोण अपनाया गया कि उन्हें वहाँ प्रतिस्पर्धात्मक खेलों में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। कुछ लोगों को लगता है कि रंगभेद की नीति के खात्मे में इसका एक प्रभावी योगदान था, जबकि दूसरों को लगता है कि यह काफी लंबे समय तक चल सकता था और और अपना सबसे बुरा प्रभाव दिखा सकता था।[7]

[[1936 के बर्लिन में आयोजित ग्रीष्मकालीन ओलंपिक|1936 के बर्लिन में आयोजित ग्रीष्मकालीन ओलंपिक]] एक मिसाल था, शायद पीछे मुड़कर आत्मनिरीक्षण करने का, जहाँ एक विचारधारा विकसित हुई, जिसने प्रचार-प्रसार के माध्यम से खुद को मजबूत करने के लिए आयोजन का उपयोग किया।

 
आधुनिक खेल में मोटरीकरण का आगमन हुआ है।

आयरलैंड के इतिहास में, गेलिक खेल सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जुड़े हुए थे। 20वीं सदी के मध्य तक कोई व्यक्ति गेलिक फुटबॉल खेलने, प्रक्षेपण, या गेलिक एथलेटिक एसोसिएशन (GAA) द्वारा प्रशासित खेलों में भाग लेने से रोका जा सकता था, अगर वह ब्रिटिश मूल के फुटबॉल या अन्य खेलों में भाग लेता या समर्थन करता। हाल तक GAA ने गेलिक स्थानों फुटबॉल और रग्बी यूनियन के खेलने पर प्रतिबंध जारी रखा था। यह प्रतिबंध आज भी लागू है, लेकिन There are no products to list in this category.

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